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Wednesday, May 13, 2020

विदेशी तकनीक का इस्तेमाल कर जनता को स्वदेशी अपनाने का आदेश कैसे दे सकते है हमारे गृहमंत्री-PIL एक्सपर्ट मणिभूषण सेंगर

               
     
कोरोना वायरस महामारी के बीच जारी लॉकडाउन में मौजूदा परिस्थिति भारत के लिए एक अवसर बन सकती है, ऐसे में हमें आत्मनिर्भर बनना है. ये बयान  देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिए है। पीएम की इस पहल का असर भी दिखाई देने लगा है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस दिशा में एक बड़ा फैसला लिया है. लेकिन ये फैसला पर अब सवाल उठने लगे है......गृह मंत्रालय की ओर से यह निर्णय लिया गया है कि सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की कैंटीन पर अब सिर्फ स्वदेशी उत्पादों की ही बिक्री होगी. ये आदेश देशभर की सभी कैंटीनों पर 1 जून से लागू होगा.केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है.

अब ऐसे में आप सोच रहे होंगे कि ये तो अच्छी बात है तो फिर ऐसे बयां पर सवाल क्यूँ ?
पटना हाई कोर्ट के PIL एक्सपर्ट मणि भूषण प्रताप सेंगर ने प्लस न्यूज़ के साथ खास बातचीत में बताया कि जब माननीय गृह मंत्री अमित साह जी खुद विदेशी तकनीक का इस्तेमाल कर देश की जनता को स्वदेशी अपनाने का ये कैसा मैसेज दे रहे है ..उन्होने आगे बताया की क्या विडंबना है?धन्य है हमारे यहां के तथाकथित राजा लोग। अपनी बात तक रखने के लिए स्वदेशी माध्यम का इस्तेमाल नहीं करेंगे। लेकिन दूसरे को स्वदेशी अपनाने और विदेशी त्याग करने का पाठ पढ़ाएंगे। और आदेश देंगे  हमारे गृह मंत्री जी ने जो स्वदेशी अपनाने का संदेश दिया है। यह संदेश ट्विटर और फेसबुक जैसे विदेशी प्लेटफॉर्म पर ना देकर।  इन दोनों माध्यमों का त्याग कर दूरदर्शन और रेडियो पर भी संदेश दिया जा सकता था। लेकिन इन्होंने त्याग नहीं किया। जो करे आम जनता करें ।यह खाली जुमलेबाजी और तानाशाह की तरह आदेश देंगे। स्वदेशी अपनाना बहुत अच्छी बात है । इस फैसले का मैं सम्मान करता हूं ।और इस फैसले का स्वागत करता हूं । लेकिन केवल जनता ही क्यों अपनाए आप भी अपनाइए। सरकार में बैठे लोग भी अपनाएं। तब जनता को भी सीख मिलेगी। पहले आप यह स्वदेशी अपनाइए।तब आपको यह अधिकार होगा कि दूसरे पर आप इसे थोप सकें। अरे हम तो जनता हैं ।हम आपके तानाशाही आदेश को मानेंगे। हमने कोई खुद से विदेशी नहीं अपनाया । आपने विदेशियों को बुलाया तो विदेशियों को हमने अपनाया। इसलिए कम से कम आप इस ट्विटर और फेसबुक को त्याग कर दूरदर्शन रेडियो पर अपनी बातों को रखें। भारतीय मीडिया में अपनी बातों को रखें। ऐसी माध्यमों से हम तक अपनी बात पहुंचाए जहां की पूरी स्वदेशी संसाधनों का इस्तेमाल होता है। तब दूसरे पर आदेश थोपें..........
                       



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