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Thursday, March 31, 2022

मां के गर्भ में ही उठ गया था पिता का साया, मैट्रिक मे बनी जहानाबाद की टॉपर



*मैट्रिक परीक्षा में 94.4 फीसदी अंक लाकर जिले का नाम किया रौशन*

जहानाबाद। जरा सोचिए कि जिस बच्ची के पिता की मौत उसके जन्म लेने से पहले जब वह मां के गर्भ में  रहते हो जाये और घर मे कोई पुरुष गार्जियन न हो और आर्थिक तंगी के पढ़ाई छोड़ने की नौबत तक आ जाये और हालात में वह मैट्रिक की परीक्षा में जिला टॉपर हो तो उसके मजबूत इरादे को दाद देनी ही होगी।जी हां हम बात कर रहे है। बिहार के जहानाबाद के एक ऐसी होनहार बिटिया ने ना सिर्फ अपने परिजनों बल्कि जिले 1वासियों का गर्व से सीना चौड़ा कर दियाहै। जहानाबाद के सुमेरा गांव की प्रियांशु कुमारी ने बिहार के मैट्रिक परीक्षा में विषम परिस्थितियों में जिला टॉपर आकर और पूरे जिले को गौरान्वित कर दिया है ।प्रियांशु को मैट्रिक में  94.4 फ़ीसदी अंक हासिल करने का गौरव प्राप्त हुआ 


*मां के गर्भ में ही उठ गया था पिता का साया*

सुमेरा की रहने वाली होनहार बिटिया प्रियांशु कुमारी की सफलता इस मायने में भी उल्लेखनीय है कि जब प्रियांशु अपने माँ के गर्भ में थी, उसी समय उसके पिता की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। प्रियांशु के पिता स्व. मुन्ना शर्मा का साया बचपन में ही उसके सिर से उठ गया था, जिससे उसके घर कोई पुरुष गार्जियन नही है। 2005 में उसके पिता की आकस्मिक मृत्यु हो गई थी परंतु प्रियांशु के जिद्द और अच्छी परवरिश ने उसके हौसले की उड़ान को पंख लगा दिए। दादी सुमित्रा देवी बताती हैं कि एक वक्त ऐसा भी आया कि आर्थिक अभाव में पढ़ाई छोड़ने की नौबत आ गई थी, परंतु उस वक्त मंटू नामक शिक्षक ने उसकी काफी मदद की। प्रियांशु की मां कहती है कि उनकी बेटी ने चाहे जाड़ा गर्मी या बरसात हो, एक दिन भी स्कूल नहीं छोड़ा था। इधर प्रियांशु की इस सफलता से पूरे गांव में खुशी का माहौल कायम हो गया है।

*आईएएस बनना चाहती है प्रियांशु*

मैट्रिक परीक्षा में 472 अंक लाकर जिले में अव्वल आने वाली प्रियांशु कुमारी अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार और स्कूल के शिक्षकों को देती है। शिक्षकों के सहयोग के कारण दिक्कत आर्थिक तंगी मे पढ़ाई छोड़ने की नौबत नही आई। प्रियांशु बताती है अलीगंज हाई स्कूल के शिक्षकों का भी भरपूर सहयोग मिला और वे कोरोना काल में भी मजबूती से अपनी पढ़ाई में जुटी रही। प्रियांशु का सपना आईएएस बनकर देश की सेवा करने का है। बहरहाल, प्रियांशु की सफलता यह साबित करती है कि अगर इरादे फौलाद की तरह मजबूत हो तो सफलता एकदिन कदम जरूर चूमती है।


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